कारोई के चारभुजा नाथ मंदिर में भक्ति और रंगों का अद्भुत संगम

गुरला।
नेशनल हाईवे 758 स्थित विश्व विख्यात ज्योतिष नगरी कारोई कस्बे के नीम का चौक स्थित चारभुजा नाथ मंदिर प्रांगण में महिला मंडल द्वारा हर्षोल्लास के साथ फागोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। मंदिर परिसर अबीर-गुलाल और पुष्पों की सुगंध से सराबोर नजर आया, जहां श्रद्धालुओं ने भक्ति और रंगों के इस उत्सव का आनंद लिया।


भगवान चारभुजा की सजी मनमोहक झांकी

फागोत्सव के अवसर पर मातृशक्ति ने भगवान चारभुजा की आकर्षक झांकी सजाई। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भगवान को गुलाल अर्पित कर होली खेलने की शुरुआत की गई।

महिलाओं ने ठाकुरजी संग फूलों और गुलाल की होली खेलते हुए सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण स्वरूप सजी सखियों ने गोपियों के रूप में रंग-गुलाल उड़ाया और भक्तिमय वातावरण बना दिया।


फाग गीतों पर झूम उठीं महिलाएं

आयोजन के दौरान महिलाओं ने मंजीरे और ढोलक की थाप पर पारंपरिक फाग गीतों और भजनों की प्रस्तुति दी।

“होली खेल रहे बांके बिहारी…”,
“आज बिरज में होरी रे रसिया…”,
“बाबा नंद के दरबार मची होली…”,
“कानूड़ा लाल घडलो म्हारो…”,
“होली आई होली आई…”

जैसे गीतों पर उपस्थित महिलाएं झूम उठीं। सामूहिक नृत्य और भक्ति संगीत ने पूरे मंदिर परिसर को उत्साह और आनंद से भर दिया। रंगों के इस त्योहार में भक्ति और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला।


सौहार्द और एकता का संदेश

कार्यक्रम में महिला मंडल सहित सर्व समाज की महिलाएं उपस्थित रहीं। आयोजन के अंत में सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

माया ने बताया कि फागोत्सव का यह आयोजन मातृशक्ति के लिए विशेष अवसर रहा, जहां सभी ने एकजुट होकर भक्ति के रंगों में सराबोर होकर भगवान की आराधना की और आपसी सौहार्द व एकता का संदेश दिया।

फागोत्सव के इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि रंगों का पर्व केवल उल्लास का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और भक्ति भाव को भी मजबूत करने का माध्यम है।