भीलवाड़ा।
भीलवाड़ा जिले में कस्तूरी ब्रांड कपास की खेती को औपचारिक रूप से प्रारंभ करने की घोषणा “भारत कोटनैट 2026–27” राष्ट्रीय अधिवेशन में की गई। यह आयोजन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज़ से संबद्ध कॉटन डेवलपमेंट एंड रिसर्च एसोसिएशन, मुंबई के तत्वावधान में संपन्न हुआ। अधिवेशन में टेक्सपोरोसिल के माध्यम से कस्तूरी कपास को किसानों के बीच लागू करने की विधिवत घोषणा की गई।

कार्यक्रम में कृषि विभाग, महाराणा प्रताप कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, बीज कंपनियों के प्रतिनिधि, भीलवाड़ा के प्रमुख वस्त्र उद्यमी तथा प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। कपास विकास के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा करते हुए भावी योजनाओं पर विस्तृत मंथन किया गया।

राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र से आए किसानों ने अधिवेशन में भाग लिया। पिछले वर्ष अधिक उपज लेने वाले किसानों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पूर्व उपनिदेशक कृषि पी.एन. शर्मा को कपास विकास में विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2007 में भीलवाड़ा जिले में कपास की औसत उपज मात्र 214 किलो रुई प्रति हेक्टेयर थी, जिसे निरंतर प्रयासों से बढ़ाकर लगभग 950 किलो रुई प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाया गया। यह उपलब्धि वैश्विक औसत के समकक्ष मानी जा रही है, जबकि भारत का औसत अभी लगभग 460 किलो रुई प्रति हेक्टेयर है।

कपास में माइकोराइज़ा तकनीक का प्रयोग पहली बार शुरू कर इसे गेहूं, मक्का, अफीम और ज्वार जैसी फसलों तक भी विस्तारित किया गया। वर्तमान में राजस्थान सरकार माइकोराइज़ा को अनुदान पर वितरित कर रही है।

परियोजना के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण को विशेष महत्व दिया गया, जिसमें 100 प्रतिशत महिलाओं को शामिल किया गया। महिलाओं को अचार एवं सिरका निर्माण जैसे प्रशिक्षण देकर अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराए गए। बीते वर्ष 11 किसानों को मुंबई प्रशिक्षण हेतु भेजा गया, जिनमें 6 महिलाएं शामिल रहीं।

केंद्र सरकार की कस्तूरी योजना के तहत ब्रांडेड कपास से लेकर तैयार वस्त्र तक पूरी ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और भीलवाड़ा के वस्त्र उद्योग को गुणवत्तापूर्ण स्थानीय कच्चा माल उपलब्ध होगा।

कार्यक्रम में यह विश्वास व्यक्त किया गया कि भीलवाड़ा न केवल कस्तूरी कपास का उत्पादन करेगा, बल्कि स्थानीय उद्यमी इसका उपयोग कर जिले की औद्योगिक पहचान को और मजबूत करेंगे। यह पहल किसानों और उद्योग दोनों के लिए सराहनीय कदम मानी जा रही है।

गुरला से बद्री लाल की रिपोर्ट