नई दिल्ली। राजधानी में नकली सोने को असली बताकर वित्तीय संस्थाओं को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक ऐसे शातिर जालसाज को दबोचा है जो खुद कंपनी के भीतर ही एक महत्वपूर्ण पद पर तैनात था। आरोपी लंबे समय से इस नामी फाइनेंस कंपनी में काम कर रहा था और उसी की मिलीभगत से इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जा रहा था।

फाइनेंस कंपनी के भीतर चल रहे बड़े खेल का भंडाफोड़

पुलिस की गिरफ्त में आया आरोपी पिछले कई सालों से साई फिनकार्प प्राइवेट लिमिटेड में सोने की शुद्धता जांचने वाले विशेषज्ञ यानी गोल्ड अप्रेजर के रूप में कार्यरत था। संस्थान ने जिस व्यक्ति पर करोड़ों के सोने की परख करने का भरोसा जताया था, उसी ने संस्था की पीठ में छुरा घोंप दिया। अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और पद का गलत इस्तेमाल करते हुए उसने नकली आभूषणों को असली प्रमाणित किया और कंपनी की तिजोरी से करोड़ों रुपये पार कर दिए।

सैकड़ों फर्जी खातों के जरिए करोड़ों रुपये की बड़ी चपत

जांच एजेंसियों द्वारा की गई शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि इस गिरोह ने बेहद शातिर तरीके से करीब छह सौ से अधिक फर्जी गोल्ड लोन खाते तैयार किए। इन जाली खातों के माध्यम से लगभग पौने चार करोड़ रुपये से अधिक की राशि को ठिकाने लगाया गया। आरोपी और उसके सहयोगियों ने मिलकर पूरी कागजी कार्रवाई को इस तरह अंजाम दिया ताकि किसी को भी इस बात का संदेह न हो कि जमा किया गया सोना पूरी तरह नकली है।

आंतरिक जांच और ऑडिट में खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल

हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस गोरखधंधे की भनक कंपनी प्रबंधन को लंबे समय तक नहीं लग सकी। यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब वित्तीय संस्थान ने अपने सालाना रिकॉर्ड की जांच के लिए आंतरिक ऑडिट की प्रक्रिया शुरू की। ऑडिट के दौरान जब बही-खातों और लॉकर में रखे आभूषणों का मिलान किया गया, तो वित्तीय आंकड़ों में एक बड़ा अंतर दिखाई दिया जिसके बाद इस धोखाधड़ी की परतें खुलने लगीं।

लॉकर से गायब मिले असली सोने के पैकेट

आर्थिक अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक आंतरिक ऑडिट के दौरान न केवल नकली सोने पर लोन देने की बात सामने आई, बल्कि लॉकर से असली सोने के कई कीमती पैकेट भी गायब मिले। इन पैकेटों में रखे आभूषणों की बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस सिंडिकेट में कंपनी के कुछ अन्य कर्मचारी शामिल हैं या नहीं, और ठगी गई रकम को कहां खपाया गया है।