मीनोपॉज के बाद खानपान में सुधार से रहें स्वस्थ, जानें एक्सपर्ट की सलाह
नई दिल्ली। महिलाओं में मीनोपोज यानी माहवारी बंद होने की अवस्था के बाद अक्सर पेट के आसपास यानी बेली फैट का तेजी से बढ़ना एक बहुत आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। यह कोई साधारण चर्बी नहीं होती है, जो सामान्य डाइटिंग या योग करने भर से आसानी से कम हो सके; यही कारण है कि इसे चिकित्सा की भाषा में 'जिद्दी फैट' (जिद्दी चर्बी) कहा जाता है। हाल ही में शोधकर्ताओं ने इस बात का वैज्ञानिक कारण ढूंढ निकाला है कि आखिर मीनोपोज के बाद महिलाओं का वजन और मोटापा क्यों इतनी तेजी से बढ़ता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मीनोपोज के चरण के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर काफी कम हो जाता है, जिसके चलते कूल्हों (हिप्स) और जांघों (थाईज) का फैट अपने स्थान से शिफ्ट होकर निचले पेट यानी लोअर-एब्डॉमन में जमा होने लगता है। हालांकि, यदि आप अपनी दिनचर्या और खान-पान यानी डाइट में कुछ समझदारी भरे बदलाव करें, तो शरीर के इस अतिरिक्त फैट को आसानी से घटा सकती हैं।
मीनोपोज के बाद बढ़ने वाले इस जिद्दी मोटापे को ऐसे करें कम
आमतौर पर महिलाएं अपने पेट की चर्बी को कम करने की होड़ में अपने भोजन से हर तरह के 'हेल्दी फैट' को पूरी तरह से बाहर कर देती हैं, जो कि एक गलत तरीका है। क्या आप इस बात से वाकिफ हैं कि कुछ खास और पौष्टिक वसा (फैट) ऐसे भी होते हैं, जिनका सेवन वास्तव में बैली फैट को तेजी से गलाने में मदद करता है? उदाहरण के लिए, एवोकैडो, जैतून (ऑलिव्स), सैल्मन मछली और नारियल का तेल (कोकोनट ऑयल) इसके बेहतरीन स्रोत हैं।
विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि यदि कोई व्यक्ति महीने भर के भीतर हर हफ्ते तीन बार लगभग 28 ग्राम सैल्मन मछली का सेवन करे, तो वह एक किलो से भी ज्यादा वजन आसानी से घटा सकता है। इसके अलावा, एप्पल साइडर विनेगर (सेब का सिरका) आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म (पाचन व ऊर्जा चयापचय) को तेज करने में बेहद मददगार साबित होता है। इस सिरके में मौजूद एसिटिक एसिड वजन को कम करने की प्रक्रिया को गति देता है। साथ ही, हरी सब्जियों और फलों से तैयार की जाने वाली 'ग्रीन स्मूदी' भी आपके पेट के आसपास जमी जिद्दी चर्बी को कम करने में एक कारगर उपाय साबित हो सकती है।

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