जब भीम ने समझा खुद को सबसे शक्तिशाली, हनुमान जी की पूंछ ने तोड़ दिया सारा घमंड, हनुमान जी से भीम की मुलाकात की कहानी
हनुमान जी और भीम की मुलाकात का प्रसंग रामायण और महाभारत की सबसे प्रेरक कथाओं में गिना जाता है. यह सिर्फ दो महाबलियों के मिलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि शक्ति कितनी भी बड़ी क्यों न हो, उसके साथ विनम्रता होना सबसे जरूरी है. महाभारत के वनवास काल में घटित यह घटना आज भी लोगों को यह समझाती है कि अहंकार इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी बन सकता है. यही कारण है कि इस कथा का उल्लेख धार्मिक प्रवचनों, ग्रंथों और आध्यात्मिक चर्चाओं में बार-बार किया जाता है.
भीम अपनी असाधारण ताकत पर गर्व करते थे, जबकि हनुमान जी ने बिना क्रोध किए उन्हें ऐसा सबक दिया, जिसे वे जीवनभर नहीं भूल सके. इस कथा में भक्ति, शक्ति, धैर्य और ज्ञान का अद्भुत मेल दिखाई देता है. यही वजह है कि आज भी जब विनम्रता और आत्मज्ञान की बात होती है, तो हनुमान जी और भीम की इस मुलाकात का उदाहरण सबसे पहले दिया जाता है.
हनुमान जी और भीम का क्या संबंध था?
बहुत कम लोग जानते हैं कि हनुमान जी और भीम दोनों ही पवन देव के पुत्र माने जाते हैं. इस नाते दोनों भाई थे. हनुमान जी का जन्म त्रेता युग में हुआ था, जबकि भीम द्वापर युग में पांडवों के रूप में जन्मे. दोनों में अद्भुत शारीरिक बल था, लेकिन उनके स्वभाव में बड़ा अंतर था. हनुमान जी शक्ति के साथ विनम्रता और सेवा का प्रतीक थे, जबकि भीम कई बार अपने बल पर गर्व कर बैठते थे.
कैसे हुई दोनों की मुलाकात?
महाभारत के अनुसार, वनवास के दौरान द्रौपदी ने सुगंधित सौगंधिक पुष्प की इच्छा जताई. द्रौपदी की इच्छा पूरी करने के लिए भीम उस पुष्प की खोज में निकल पड़े. रास्ते में घने जंगल के बीच उन्होंने एक वृद्ध वानर को आराम करते हुए देखा. उस वानर की पूंछ रास्ते के बीचों-बीच फैली हुई थी. भीम ने वानर से रास्ता छोड़ने के लिए कहा. वृद्ध वानर ने शांत स्वर में उत्तर दिया कि वह बूढ़ा है और उठ नहीं सकता. यदि भीम चाहें तो उसकी पूंछ हटाकर आगे बढ़ जाएं.
जब भीम से नहीं हिली पूंछ
भीम को यह बात बहुत आसान लगी. उन्होंने सोचा कि एक बूढ़े वानर की पूंछ हटाना कौन-सी बड़ी बात है. पहले उन्होंने एक हाथ से पूंछ उठाने की कोशिश की, लेकिन वह टस से मस नहीं हुई. फिर दोनों हाथों से पूरी ताकत लगा दी. इसके बाद भी पूंछ अपनी जगह से नहीं हिली. धीरे-धीरे भीम को एहसास होने लगा कि सामने बैठा साधारण वानर नहीं हो सकता. उनका आत्मविश्वास अब आश्चर्य में बदल चुका था.
हनुमान जी ने दिया विनम्रता का संदेश
जब भीम ने विनम्र होकर उस वानर से उसका परिचय पूछा, तब हनुमान जी ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया. अपने बड़े भाई के दर्शन पाकर भीम भावुक हो गए और उनके चरणों में झुक गए. हनुमान जी ने भीम से कहा कि केवल शारीरिक बल ही पर्याप्त नहीं होता. जो व्यक्ति शक्ति के साथ विनम्रता, संयम और बुद्धि को अपनाता है, वही सच्चा वीर कहलाता है. उन्होंने यह भी समझाया कि अहंकार हमेशा मनुष्य के पतन का कारण बनता है.
विशाल रूप के दर्शन भी कराए
भीम की इच्छा पर हनुमान जी ने उन्हें अपना विराट स्वरूप भी दिखाया. कहा जाता है कि उनका विशाल रूप देखकर भीम आश्चर्यचकित रह गए. तब उन्हें यह समझ आया कि संसार में उनसे कहीं अधिक शक्तिशाली और महान विभूतियां मौजूद हैं. यह अनुभव भीम के जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. इसके बाद उनके व्यवहार में पहले से अधिक धैर्य और संतुलन देखने को मिला.
महाभारत युद्ध में भी निभाया साथ
इस मुलाकात के दौरान हनुमान जी ने भीम को आशीर्वाद दिया. साथ ही उन्होंने वचन दिया कि महाभारत के युद्ध में वे अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजमान रहेंगे. इसी कारण अर्जुन के रथ पर कपि ध्वज दिखाई देता है. मान्यता है कि हनुमान जी की उपस्थिति से पांडवों का मनोबल बढ़ा और उन्हें आध्यात्मिक शक्ति भी मिली.

दो महीने पहले हुई थी शादी, मायके में नवविवाहिता ने दी जान
सीएम यादव का विपक्ष को जवाब, बोले- 'सबके लिए समान व्यवस्था होगी'
घायल छात्रों से मिलकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा
बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहा पाकिस्तान, कनाडा से मांगा सहयोग
UCC बिल पास, उत्तराखंड-गुजरात-असम के बाद चौथा राज्य बना एमपी
रोहित शर्मा के भविष्य पर अश्विन का बड़ा बयान, कहा- फैसले का सम्मान करना चाहिए