मानसून ही आखिरी उम्मीद! राजस्थान के अधिकांश बांध सूखे, पानी का बढ़ा संकट
जयपुर। राजस्थान में मानसून की आमद होने के बावजूद प्रदेश के जलाशयों की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, राज्य में फिलहाल मानसूनी हवाएं सुस्त पड़ गई हैं, जिसके चलते आगामी सप्ताह में सामान्य से कम वर्षा होने की उम्मीद है। इसी बीच जल संसाधन विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों ने सरकार की चिंता को और गहरा कर दिया है। राज्य के कुल 693 बांधों में इस समय उनकी कुल क्षमता का महज 45.49 प्रतिशत पानी ही शेष रह गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह आंकड़ा 57.70 प्रतिशत के करीब था। पिछले साल के मुकाबले इस बार बांधों में करीब 1,591 मिलियन क्यूबिक मीटर कम पानी दर्ज किया गया है। इस सूखे हालात के कारण प्रदेश के कई शहरी इलाकों में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। खुद राजधानी जयपुर के जगतपुरा जैसे क्षेत्रों में पिछले दस दिनों से जलापूर्ति ठप पड़ी है, जिससे स्थानीय निवासी महंगे पानी के टैंकरों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
कमजोर मानसून से गहराया जल संकट
प्रदेश में मानसून के प्रवेश के बाद भी झमाझम बारिश न होने से सभी छोटे-बड़े जलाशय सूखे पड़े हैं। पानी की कम आवक के कारण आने वाले दिनों में पेयजल की समस्या और विकराल रूप ले सकती है। मौसम विभाग की चेतावनी ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है कि अगले कुछ दिनों तक राहत की उम्मीद कम है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल संकट का दायरा बढ़ता जा रहा है।
लाइफलाइन बीसलपुर सहित बड़े बांधों में घटा पानी
राजस्थान के 23 सबसे बड़े बांधों में भी इस बार जलभराव की स्थिति काफी निराशाजनक है। जयपुर, अजमेर और टोंक जैसे प्रमुख जिलों को पानी की सप्लाई करने वाले बीसलपुर बांध का जलस्तर पिछले साल की तुलना में काफी नीचे चला गया है। यही स्थिति राणा प्रताप सागर और माही बजाज सागर जैसे बड़े जलस्रोतों की भी है, जहां उम्मीद के मुताबिक पानी नहीं पहुंच सका है। हालांकि, सोम-कमला-अंबा और राजसमंद जैसे कुछ बांधों में पिछले साल की तुलना में मामूली सुधार देखने को मिला है।
सैकड़ों जलाशय अब भी खाली, झमाझम बारिश का इंतजार
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के कुल 693 बांधों में से केवल 5 बांध ही ऐसे हैं जो पूरी तरह से लबालब भर पाए हैं। इसके अलावा 412 बांधों में नाममात्र का पानी उपलब्ध है, जबकि 276 बांध आज भी पूरी तरह से सूखे पड़े हैं। यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि राज्य के अधिकांश हिस्सों को सूखे की स्थिति से उबरने के लिए अभी एक बेहद मजबूत मानसूनी दौर की जरूरत है।
कैचमेंट एरिया में होने वाली बारिश पर टिकी उम्मीदें
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्ते राज्य के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। यदि चंबल, माही और बनास जैसी प्रमुख नदियों के बहाव वाले क्षेत्रों में आने वाले दिनों में अच्छी बरसात होती है, तो बांधों के खाली पड़े पेट तेजी से भर सकते हैं। जलाशयों में पानी की बेहतर आवक होने से न केवल शहरों में जारी पीने के पानी की किल्लत समाप्त होगी, बल्कि ग्रामीण इलाकों में फसलों की सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी मिल सकेगा।

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