आबूरोड। राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित आबूरोड नगर पालिका में पूर्व बोर्ड के कार्यकाल के दौरान हुए बहुचर्चित कचरा पात्र खरीद घोटाले में राज्य सरकार ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। स्वायत्त शासन विभाग ने मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी (ईओ) रामकिशोर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। आरोपी अधिकारी वर्तमान में जोधपुर संभाग के पीपाड़ सिटी नगर पालिका में अधिशाषी अधिकारी के पद पर तैनात थे, जहां इस आदेश के पहुंचते ही प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया है।

राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत की गई बड़ी दंडात्मक कार्रवाई

स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर की ओर से जारी किए गए आधिकारिक निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आबूरोड में तैनाती के दौरान रामकिशोर के खिलाफ कचरा पात्रों की खरीद में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के प्रामाणिक साक्ष्य मिले हैं, जिसके चलते उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। इसी के मद्देनजर अधिकारी को राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 13(1) के अंतर्गत तुरंत निलंबित किया गया है। आदेश के अनुसार, इस पूरी निलंबन अवधि के दौरान उनका आधिकारिक मुख्यालय स्थानीय निकाय विभाग निदेशालय, जयपुर तय किया गया है और उन्हें नियमानुसार मिलने वाले जीवन-निर्वाह भत्ते का भुगतान पीपाड़ सिटी नगर पालिका द्वारा ही किया जाएगा।

विधानसभा याचिका समिति के समक्ष पूर्व पार्षद की शिकायत से खुला राज

इस पूरे प्रशासनिक घोटाले और भ्रष्टाचार की परतों को खोलने का श्रेय आबूरोड के पूर्व पार्षद शमशाद अली अब्बासी को जाता है, जिन्होंने पूर्व नगर पालिका बोर्ड के कार्यकाल में हुए कई घपलों को लेकर सीधे विधानसभा याचिका समिति के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई थीं। पूर्व पार्षद ने अपने शिकायती पत्र में न केवल कचरा पात्रों की बेतहाशा कीमतों और घटिया खरीद का मामला उठाया था, बल्कि रेवदर रोड पर अस्पताल निर्माण के लिए नियमों को ताक पर रखकर भू-उपयोग परिवर्तन करने, शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों के टेंडर में गड़बड़ी करने, स्कूल क्षेत्र में गलत तरीके से आवासीय निर्माण की अनुमति देने तथा पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर केवल कोटेशन के जरिए मनमाने दामों पर भारी-भरकम बिजली सामग्री खरीदने जैसे कई गंभीर आरोप भी लगाए थे।

जोधपुर उपनिदेशक की उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट में कई दिग्गज पाए गए दोषी

विधानसभा याचिका समिति के कड़े रुख और निर्देशों के बाद इस पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच क्षेत्रीय स्थानीय निकाय विभाग, जोधपुर के उपनिदेशक के माध्यम से कराई गई थी। जांच टीम ने जब पालिका के रिकॉर्ड और धरातल पर हुए कार्यों का भौतिक सत्यापन किया, तो पूर्व पार्षद द्वारा लगाए गए लगभग सभी आरोप पूरी तरह सच साबित हुए। उपनिदेशक द्वारा सरकार को सौंपी गई अंतिम जांच रिपोर्ट में तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी रामकिशोर के साथ-साथ तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष मगनदान चारण और पालिका के दो अन्य कर्मचारियों जसवंत मेघवाल तथा प्रवीण सिंह चारण को सामूहिक रूप से इस भ्रष्टाचार का मुख्य दोषी करार दिया गया था।

विभागीय कार्रवाई से अन्य दागी अधिकारियों और कर्मचारियों में मचा हड़कंप

जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई इस पहली बड़ी निलंबन कार्रवाई के बाद आबूरोड और पीपाड़ सिटी दोनों ही नगर पालिकाओं के अन्य कर्मचारियों और ठेकेदारों में भारी घबराहट देखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, विभाग अब इस घोटाले में शामिल तत्कालीन पालिका अध्यक्ष मगनदान चारण और अन्य दोषी कर्मचारियों के खिलाफ भी जल्द ही कानूनी और दंडात्मक शिकंजा कसने की तैयारी में है। स्थानीय निवासियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए मांग की है कि जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग करने वाले इन सभी दोषियों से पूरी राशि की रिकवरी की जानी चाहिए और उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए।