हर किसी के लिए सही नहीं है Ice Facial, जानिए कब और कैसे करें इस्तेमाल
देश के कई हिस्सों में जारी भीषण गर्मी, चुभती धूप, अत्यधिक पसीने और वायु प्रदूषण का सबसे सीधा और नकारात्मक प्रभाव हमारी नाजुक त्वचा पर दिखाई देने लगता है। ऐसे में झुलसती त्वचा और चेहरे को तात्कालिक ठंडक, ताजगी व सुकून देने के लिए बहुत से लोग घरेलू नुस्खे के तौर पर बर्फ के टुकड़ों (आइस क्यूब्स) का सहारा लेते हैं। इन दिनों इंटरनेट, सोशल मीडिया और कई डिजिटल ब्यूटी प्लेटफॉर्म्स पर भी चेहरे पर बर्फ लगाने (फेशियल आइसिंग) का चलन काफी तेजी से बढ़ा है, क्योंकि यह चेहरे की सुस्ती को दूर कर तुरंत एक चमक और कूलिंग इफेक्ट प्रदान करता है।
हालांकि, त्वचा विज्ञान (डर्मेटोलॉजी) के विशेषज्ञों के अनुसार, हर व्यक्ति की त्वचा की बनावट (स्किन टाइप) अलग होती है और यह जरूरी नहीं कि बर्फ हर किसी के लिए फायदेमंद ही साबित हो। बिना सोचे-समझे, गलत तरीके से या अत्यधिक मात्रा में चेहरे पर सीधे बर्फ रगड़ने से त्वचा की बाहरी कोशिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए, अपनी त्वचा को सुरक्षित रखते हुए इसके सही लाभ लेने के लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि समर सीजन में इसका प्रयोग कब, कैसे और कितनी अवधि के लिए किया जाना चाहिए।
गर्मी के मौसम में फेशियल आइसिंग के मुख्य फायदे
यदि सही नियम और सीमित मात्रा में उपयोग किया जाए, तो बर्फ त्वचा के लिए एक बेहतरीन थेरेपी साबित हो सकती है, जिसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
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तात्कालिक शीतलता: चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों से झुलसी और गर्म हुई त्वचा के तापमान को बर्फ तुरंत सामान्य कर उसे रिफ्रेश करती है।
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चेहरे की सूजन (पफीनेस) से राहत: सुबह सोकर उठने के बाद चेहरे पर दिखने वाली हल्की सूजन या देर रात तक जागने के कारण आंखों के नीचे आने वाले काले घेरों और पफीनेस को कम करने में आइसिंग काफी मददगार होती है।
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रोम छिद्रों (पोर्स) का सिकुड़ना: चेहरे पर बर्फ घुमाने से त्वचा के खुले और बड़े रोम छिद्र अस्थायी रूप से टाइट और छोटे हो जाते हैं, जिससे त्वचा स्मूथ लगती है।
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सीबम और ऑयल कंट्रोल: तैलीय त्वचा (ऑयली स्किन) वाले लोगों के चेहरे पर अत्यधिक तेल के स्राव और चिपचिपाहट को बर्फ कुछ समय के लिए प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर देती है।
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सनबर्न में आराम: तेज धूप के संपर्क में आने के बाद त्वचा पर होने वाली हल्की लालिमा, जलन और रैशेज को शांत करने में यह थेरेपी काम आती है।
लापरवाही से बर्फ लगाने के संभावित नुकसान
सिक्के के दूसरे पहलू की तरह, बर्फ का गलत इस्तेमाल त्वचा की रंगत और सेहत को बिगाड़ भी सकता है:
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त्वचा में तीखा लालपन और जलन: जिन लोगों की स्किन अत्यधिक संवेदनशील होती है, उनके चेहरे पर सीधे बर्फ रगड़ने से 'आइस बर्न' हो सकता है, जिससे त्वचा लाल पड़ जाती है और खुजली होने लगती है।
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अत्यधिक रूखापन (ड्रायनेस): लंबे समय तक या बार-बार चेहरे पर बर्फ लगाने से त्वचा की प्राकृतिक नमी (मॉइस्चर) छिन जाती है, जिससे स्किन बेजान और रूखी हो जाती है।
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रक्त वाहिकाओं पर दबाव: बहुत अधिक ठंडे तापमान के सीधे संपर्क में आने से चेहरे की महीन और संवेदनशील रक्त कोशिकाएं (ब्लड वेसल्स) सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त संचार प्रभावित हो सकता है।
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कोल्ड एलर्जी का खतरा: कुछ लोगों का शरीर ठंड के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है, जिसे चिकित्सा भाषा में 'कोल्ड अर्टिकेरिया' कहते हैं। ऐसे लोगों के चेहरे पर बर्फ लगाने से दाने या चकत्ते उभर सकते हैं।
चेहरे पर आइसिंग करने का प्रामाणिक और सही तरीका
अपनी त्वचा को सुरक्षित रखते हुए चमक बढ़ाने के लिए डर्मेटोलॉजिस्ट द्वारा सुझाए गए इन चरणों का पालन करें:
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सीधे इस्तेमाल से बचें: कभी भी बर्फ के टुकड़े को सीधे नंगे हाथों से चेहरे की त्वचा पर न रगड़ें। बर्फ को हमेशा एक साफ, धुले हुए और मुलायम सूती (कॉटन) के कपड़े या रूमाल में लपेटकर ही इस्तेमाल करें।
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समय सीमा का ध्यान रखें: कपड़े में लिपटी बर्फ को चेहरे पर केवल 30 से 60 सेकंड (एक मिनट से कम) के लिए ही हल्के हाथों से, गोलाकार गति (सर्कुलर मोशन) में घुमाएं।
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एक जगह न रोकें: बर्फ को चेहरे के किसी एक हिस्से या पैच पर लगातार दबाकर न रखें, इसे पूरे चेहरे पर धीरे-धीरे मूव करते रहें।
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सीमित उपयोग: चौबीस घंटे के भीतर एक या अधिकतम दो बार से ज्यादा चेहरे पर बर्फ का इस्तेमाल न करें।
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घाव पर मनाही: यदि चेहरे पर किसी प्रकार का कट, छिलने का निशान, गंभीर मुंहासे या कोई एक्टिव स्किन इंफेक्शन हो, तो वहां बर्फ बिल्कुल न लगाएं।
इन लोगों को फेशियल आइसिंग से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए:
स्किन केयर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निम्नलिखित स्थितियों या त्वचा के प्रकार वाले लोगों को चेहरे पर बर्फ का प्रयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए:
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अत्यधिक संवेदनशील या पतली त्वचा वाले लोग।
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जिन्हें ठंडी चीजों या ठंडे मौसम से शारीरिक एलर्जी (Cold Allergy) की शिकायत हो।
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'रोसैसिया' (Rosacea) या एग्जिमा जैसी गंभीर और क्रॉनिक त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीज।
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चेहरे पर खुले घाव, ब्लीडिंग या मवाद वाले मुहांसों का संक्रमण होने की स्थिति में।

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