छत्तीसगढ़ में हाईराइज बिल्डिंग्स पर सरकार का शिकंजा, फायर सेफ्टी नियमों की होगी कड़ी निगरानी
रायपुर: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में बीते दिनों एक बहुमंजिला इमारत में संचालित कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 15 मासूम छात्रों की असामयिक मृत्यु और 9 अन्य के गंभीर रूप से झुलसने की हृदयविदारक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस त्रासद हादसे से सबक लेते हुए छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने प्रदेशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने भविष्य में ऐसे किसी भी हादसे को रोकने के लिए प्रदेश की सभी बहुमंजिला इमारतों, व्यावसायिक परिसरों और कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने का फैसला किया है।
नगरीय निकायों को जारी हुई सख्त एडवायजरी, मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं
छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी नगर पालिक निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों के लिए एक हाई-अलर्ट एडवायजरी जारी की है। इस आधिकारिक आदेश के तहत सूबे के सभी नगर निगम आयुक्तों (कमिश्नर्स) और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में आने वाली हर एक ऊंची और बहुमंजिला इमारत में स्थापित की गई अग्नि शमन प्रणाली (फायर सेफ्टी) और लिफ्ट सुरक्षा से जुड़े नियमों का कड़ाई से और अनिवार्य रूप से ऑन-ग्राउंड पालन सुनिश्चित करवाएं।
आवासीय और व्यावसायिक दोनों परिसरों में सुरक्षा को दी जाएगी सर्वोच्च प्राथमिकता
राज्य सरकार द्वारा जारी इन नए कड़े दिशा-निर्देशों के मुताबिक, प्रदेश में स्थित सभी ऊंची आवासीय सोसायटियों, मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, कोचिंग हब और मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड यूज) वाले भवनों में रहने वाले नागरिकों तथा वहां आने-जाने वाले आगंतुकों (विजिटर्स) की जान-माल की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए भवनों में स्थापित फायर अलार्म, पानी की बौछार करने वाले स्प्रिंकलर सिस्टम, अग्निशामक सिलेंडर (फायर एक्स्टिंग्विशर) और आपातकालीन निकास द्वारों (इमरजेंसी एग्जिट) की भौतिक जांच की जाएगी। साथ ही लिफ्ट के संचालन से जुड़े सभी अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन कराया जाएगा।
जारी किए गए सरकारी आदेश की 3 सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण बातें:
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लिफ्ट सुरक्षा का कड़ा क्रियान्वयन: सभी स्थानीय निकायों के जिम्मेदार अधिकारी और इंजीनियर अपने प्रशासनिक दायरे में आने वाली इमारतों का औचक निरीक्षण करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि लिफ्ट की तकनीकी स्थिति, ओवरलोडिंग अलार्म और सेंसर पूरी तरह से कार्यशील हों।
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आरडब्ल्यूए और मेंटेनेंस एजेंसियों को अंतिम चेतावनी: रिहायशी सोसायटियों की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), भवन प्रबंधन समितियों और लिफ्ट का रखरखाव करने वाली टेक्निकल वेंटेज एजेंसियों को इन नए नियमों और सुरक्षा मानकों की तुरंत लिखित जानकारी देकर जवाबदेह बनाया जाएगा।
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जन-जागरूकता के लिए विशेष अभियानों की शुरुआत: बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले आम नागरिकों, बच्चों और सोसायटियों को लिफ्ट के सुरक्षित उपयोग, बिजली गुल होने की स्थिति में ऑटो रेस्क्यू डिवाइस (ARD) के इस्तेमाल और आग लगने पर अपनाए जाने वाले सुरक्षात्मक उपायों के प्रति जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर विशेष मॉक-ड्रिल और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।

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