IAS से राजनीति तक: कौन हैं सुजाता कार्तिकेयन, जिनकी BJD में एंट्री बनी सुर्खियां
भुवनेश्वर: ओडिशा के राजनीतिक गलियारों से एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहां पूर्व नौकरशाह और कद्दावर नेता वीके पांडियन की पत्नी सुजाता राउत कार्तिकेयन गुरुवार को औपचारिक रूप से बीजू जनता दल (BJD) में शामिल हो गईं। सुजाता की पार्टी में एंट्री ऐसे समय में हुई है जब बीजद गंभीर अंदरूनी कलह और असंतोष से जूझ रही है, और उसके कई दिग्गज नेता पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम चुके हैं। हालांकि, सुजाता के आने से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के एक वर्ग में थोड़ी असहजता और बेचैनी साफ देखी जा रही है। इस बीच, बीजद प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया है कि पार्टी की कमान और नियंत्रण पूरी तरह उनके हाथों में है और इसे लेकर किसी को कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुजाता कार्तिकेयन फिलहाल पार्टी में केवल एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में ही अपनी सेवाएं देंगी।
क्या यह बीजद के किसी बड़े 'उत्तराधिकार प्लान' का हिस्सा है?
नवीन पटनायक के पूरे राजनीतिक सफर को देखें, तो उन्होंने हमेशा अपने किसी बेहद भरोसेमंद सहयोगी को सरकार और संगठन चलाने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। लंबे समय तक यह भूमिका पूर्व नौकरशाह प्यारीमोहन महापात्र ने निभाई, लेकिन बाद में मतभेदों के कारण उन्हें बाहर कर दिया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में निजी सचिव रहे वीके पांडियन साल 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सबसे शक्तिशाली चेहरे बनकर उभरे। हालांकि, चुनाव में पार्टी की करारी हार का ठीकरा उन्हीं पर फोड़ा गया, जिसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। इसके बावजूद वह आज भी नवीन पटनायक के सबसे करीबी बने हुए हैं और माना जा रहा है कि अपनी पत्नी सुजाता को पार्टी में लाने के पीछे उन्हीं का दिमाग है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सत्ता से बाहर होने और पटनायक की बढ़ती उम्र को देखते हुए, भविष्य के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद नेतृत्व तैयार करने के उद्देश्य से इस 'उत्तराधिकार योजना' पर काम किया जा रहा है।
कौन हैं सुजाता कार्तिकेयन? जानें उनका सफर
51 वर्षीय सुजाता कार्तिकेयन ओडिशा की सबसे तेजतर्रार और प्रभावशाली महिला आईएएस (IAS) अधिकारियों में शुमार रही हैं। बीजद सरकार के कार्यकाल के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना 'मिशन शक्ति' का नेतृत्व किया, जिसने उन्हें राज्य के कोने-कोने में पहचान दिलाई। सुजाता ने मार्च 2025 में ही अपनी सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली थी, जबकि उनके पति वीके पांडियन ने अक्टूबर 2023 में नौकरशाही छोड़कर राजनीति का रुख किया था।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो सुजाता ने दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक (Graduation) और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में परास्नातक (Post Graduation) की डिग्री हासिल की है। आईएएस ट्रेनिंग के दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु अधिकारी का 'अशोक बोमबावले पुरस्कार' भी मिला था। इसी ट्रेनिंग के दौरान उनकी मुलाकात वीके पांडियन से हुई थी, जिसके बाद दोनों ने विवाह कर लिया और पांडियन पंजाब कैडर छोड़कर ओडिशा आ गए। इस नौकरशाह दंपति के दो बच्चे हैं।

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