उज्जैन में हाउसिंग बूस्ट: PM आवास योजना के तहत EWS, LIG, MIG के लिए अलग फ्लैट
उज्जैन। प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत बाबा महाकाल की नगरी में एक बड़ी आवासीय परियोजना की तैयारी की जा रही है। श्री महाकालेश्वर मंदिर से महज दो किलोमीटर दूर नीलगंगा स्थित कवेलू कारखाना परिसर में 814 आधुनिक फ्लैटों का निर्माण प्रस्तावित है। खास बात यह है कि केंद्र सरकार से अभी इस परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है, लेकिन मंदिर के नजदीक होने के कारण लोगों में इसे लेकर इतना उत्साह है कि अब तक 2 हजार से अधिक आवेदन आ चुके हैं।
नगर निगम द्वारा करीब 260 करोड़ रुपए की लागत से विकसित की जाने वाली इस बहुमंजिला आवासीय परियोजना को मेयर इन काउंसिल (MIC) की मंजूरी मिल चुकी है। इस पूरे प्रोजेक्ट का विवरण और इसकी मुख्य चुनौतियां निम्नलिखित हैं:
चार हेक्टेयर में आधुनिक टाउनशिप और कमर्शियल हब
इस परियोजना को लगभग चार हेक्टेयर क्षेत्र में अलग-अलग ब्लॉकों में बहुमंजिला इमारतों के रूप में विकसित किया जाएगा। परिसर में चौड़ी सड़कें और सार्वजनिक सुविधाओं समेत एक बेहतरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा, जिसमें मंदिर और तालाब क्षेत्र को सुरक्षित व अलग रखा जाएगा। इसके अलावा, प्रोजेक्ट को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए निगम ने यहां 5 से 8 हजार वर्गफीट के 12 बड़े व्यावसायिक भूखंड (कमर्शियल प्लॉट) प्रस्तावित किए हैं, जिनका उपयोग होटल या रेस्टोरेंट के लिए होगा। साथ ही 20 दुकानों का निर्माण भी किया जाएगा ताकि इनसे होने वाली आय का उपयोग प्रोजेक्ट के प्रबंधन में हो सके।
विभिन्न वर्गों के लिए फ्लैट्स की श्रेणियां और कीमतें
टाउनशिप में समाज के हर वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तीन अलग-अलग श्रेणियों में फ्लैट बनाए जाएंगे:
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ईडब्ल्यूएस (EWS) - 206 फ्लैट: यह 1 बीएचके फ्लैट होंगे, जिनका साइज 375 वर्गफीट और अनुमानित कीमत 10 से 12 लाख रुपए होगी। इसमें पात्र परिवारों को सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
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एलआईजी (LIG) - 304 फ्लैट: यह 2.5 बीएचके फ्लैट होंगे, जिनका साइज 950 वर्गफीट और अनुमानित कीमत 25 से 30 लाख रुपए होगी। इस श्रेणी में बैंक लोन पर निर्धारित छूट मिलने की संभावना है।
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एमआईजी (MIG) - 304 फ्लैट: यह 3 बीएचके फ्लैट होंगे, जिनका साइज 1200 वर्गफीट और अनुमानित कीमत 45 से 50 लाख रुपए होगी। इसमें भी नियमानुसार बैंक लोन पर रियायत का प्रावधान संभावित है।
समय पर निर्माण और वित्तीय प्रबंधन की बड़ी चुनौती
निगम के लिए यह नई योजना जितनी बड़ी सौगात है, उतनी ही बड़ी चुनौती पुराने अधूरे प्रोजेक्ट्स से सीख लेकर इसे समय पर पूरा करने की होगी। कानीपुरा में ईडब्ल्यूएस ब्लॉक बनने के बाद भी एलआईजी और एमआईजी प्रोजेक्ट्स सालों से लटके हुए हैं, जबकि मंछामन में 288 फ्लैटों का काम आठ साल बाद भी अधूरा है। ऐसे में नीलगंगा परियोजना को सफल बनाने के लिए मजबूत वित्तीय योजना और तय समय सीमा में काम पूरा करना सबसे अहम होगा, जिसमें कमर्शियल भूखंडों से होने वाली कमाई मददगार साबित हो सकती है।

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