विधानसभा की वित्तीय समितियां गठित, पूरी सूची और जिम्मेदारियां सामने
जयपुर | विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने चार प्रमुख वित्तीय समितियों का गठन किया है। इनमें जनलेखा समिति, प्राक्कलन समिति ‘क’, प्राक्कलन समिति ‘ख’ और राजकीय उपक्रम समिति शामिल हैं। इन सभी समितियों का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक रहेगा।प्राक्कलन समिति ‘क’ में प्रताप सिंह सिंघवी, शांति धारीवाल, समाराम, हरेंद्र मिर्धा, छोटूसिंह, अर्जुन लाल, जीवाराम चौधरी, सुरेश मोदी, अमित चाचाण, मनोज कुमार (सादुलपुर) और विश्वराज सिंह मेवाड़ को शामिल किया गया है।प्राक्कलन समिति ‘ख’ में पुष्पेंद्र सिंह, शंकरसिंह रावत, गोविंद सिंह डोटासरा, हमीर सिंह भायल, पब्बाराम विश्नोई, समरजीत सिंह, मनोज कुमार (सुजानगढ़), अमीन कागजी, डॉ. सुभाष गर्ग और अरुण चौधरी को सदस्य नियुक्त किया गया है।वहीं राजकीय उपक्रम समिति में डॉ. दयाराम परमार, श्रवण कुमार, संजीव कुमार, हरिमोहन शर्मा, रीटा चौधरी, यूनुस खान, गोपाल लाल शर्मा, शत्रुधन गौतम, गोरधन, ललित मीना, अनिल कुमार शर्मा और डॉ. शैलेश सिंह को सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है।
1. जनलेखा समिति
सरकार के खर्च की जांच करती है
CAG (कैग) की रिपोर्टों की समीक्षा करती है
यह देखती है कि पैसा नियमों के अनुसार खर्च हुआ या नहीं
गड़बड़ी मिलने पर जवाबदेही तय करती है
2. प्राक्कलन समिति ‘क’ और ‘ख’
सरकारी विभागों के बजट (अनुमान) की जांच करती हैं
यह सुझाव देती हैं कि खर्च कैसे कम और प्रभावी हो सकता है
योजनाओं की उपयोगिता और कार्यक्षमता का मूल्यांकन करती हैं
सरकार को सुधार के लिए सिफारिशें देती हैं
3. राजकीय उपक्रम समिति
सरकारी कंपनियों और उपक्रमों के कामकाज की समीक्षा करती है
उनके वित्तीय प्रदर्शन और प्रबंधन की जांच करती है
घाटे या अनियमितताओं पर सवाल उठाती है
सुधार और बेहतर संचालन के सुझाव देती है

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