भीलवाड़ा में यूआईटी लॉटरी पर सवाल, विधायक कोठारी ने विधानसभा में उठाया मुद्दा

भीलवाड़ा, 25 फरवरी।
नगर विकास न्यास (यूआईटी) द्वारा 3081 भूखंडों के लिए निकाली गई लॉटरी की गहन जांच अथवा उसे निरस्त कर पुनः पारदर्शी प्रक्रिया से आयोजित करने की मांग को लेकर भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी ने राजस्थान विधानसभा में जोरदार तरीके से आवाज उठाई।

विधानसभा में नगरीय विकास एवं आवासन तथा स्वायत्त शासन विभाग पर चर्चा के दौरान विधायक कोठारी ने शहर के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों को विस्तार से रखा और सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की।


3081 भूखंडों की लॉटरी पर उठे सवाल

विधायक कोठारी ने कहा कि 16 अक्टूबर 2025 को निकाली गई भूखंड लॉटरी में लगभग 90 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों के बीच पारदर्शिता को लेकर अनेक प्रश्नचिह्न खड़े हुए हैं।

उन्होंने मांग की कि:

  • 3081 भूखंडों की लॉटरी की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

  • यदि अनियमितता प्रमाणित हो तो लॉटरी को निरस्त कर पुनः निष्पक्ष प्रक्रिया से आयोजित किया जाए।

  • गरीब एवं अल्प आय वर्ग के लिए आरक्षित भूखंडों की संख्या बढ़ाई जाए।

  • प्रतीक्षा सूची सार्वजनिक की जाए।

  • उपयोग में लिए गए सॉफ्टवेयर और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

उन्होंने कहा कि आम नागरिकों के विश्वास की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए।


बजट की सराहना, आधारभूत संरचना पर जोर

चर्चा के दौरान विधायक कोठारी ने राज्य सरकार के बजट की सराहना करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर्ज पर राज्य सरकार ने भी आधारभूत संरचना विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है, जो शहरी विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो, तो भीलवाड़ा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों को बड़ा लाभ मिलेगा।


ओवरब्रिज कार्यों में आई गति

विधायक कोठारी ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के समय स्वीकृत लगभग 132 करोड़ रुपये की लागत वाले चार ओवरब्रिज वर्ष 2019, 2021 एवं 2023 में पूर्ण होने थे, किंतु समय पर पूरे नहीं हो सके।

उन्होंने कहा कि पिछले बजट सत्र में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाने के बाद मंत्री स्तर पर मॉनिटरिंग बढ़ाई गई, जिसके परिणामस्वरूप कार्यों में तेजी आई है।

  • एक ओवरब्रिज पूर्ण हो चुका है।

  • शेष ओवरब्रिज जून 2026 तक पूर्ण होने की संभावना है।


शहरी आधारभूत सुविधाओं के लिए प्रमुख मांगें

भीलवाड़ा में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए विधायक कोठारी ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं—

  • मल्टीस्टोरी भवनों में आगजनी नियंत्रण हेतु नगर निगम को 42 मीटर फायर लैडर उपलब्ध कराई जाए।

  • नेहरू तलाई स्थित दोनों पार्कों एवं तालाब का सौंदर्यीकरण किया जाए।

  • राजीव गांधी ऑडिटोरियम का जीर्णोद्धार अथवा नवीन निर्माण कराया जाए।

  • सुवाणा से मंडपिया तक 13 किमी बाईपास का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या अन्य माध्यम से कराया जाए।

  • 80% भूमि उपलब्ध होने के कारण आधुनिक ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किया जाए।

  • सार्वजनिक पार्कों में डिजिटल सेवा कियोस्क स्थापित किए जाएं।


प्रशासनिक सुधार संबंधी प्रस्ताव

विधायक कोठारी ने प्रशासनिक सुधारों को लेकर भी कई सुझाव दिए—

  • नगर विकास न्यास में स्थानीय विधायक को सदस्य बनाया जाए।

  • आधुनिक भीलवाड़ा योजना की अनियमितताओं की सूक्ष्म जांच हो।

  • सामाजिक एवं अन्य संस्थाओं को भूमि आवंटन पूर्व नीति अनुसार 10% दर पर किया जाए।

  • नगर विकास न्यास अभियंताओं की डीपीसी एवं पदोन्नति शीघ्र की जाए।


सामाजिक व जनहित से जुड़े सुझाव

उन्होंने अमृत 2.0 योजना के कार्य शीघ्र पूर्ण करने, सीवरेज से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत, कच्ची बस्तियों के पट्टों के लिए समय सीमा तय करने और रोड लाइट बिलों का भुगतान मुख्यालय स्तर से कराने की मांग भी की।

साथ ही—

  • यूडीएच टैक्स (2007-08 आधार) पर ब्याज छूट सहित एमनेस्टी योजना लागू करने,

  • सभापति/मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा कराने,

  • सफाई भर्ती में वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता देने,

  • वेण्डर एवं नॉन-वेण्डर जोन चिन्हित करने,

  • चरागाह भूमि को नगरीय वन के रूप में विकसित करने,

  • घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु समाज को शहरी क्षेत्र में निःशुल्क भूमि/पट्टे प्रदान करने की मांग भी रखी।

उन्होंने राजस्थान टाउनशिप पॉलिसी 2010 एवं 2015 के अंतर्गत निजी कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं विकसित करने और वीर तेजाजी महाराज के 500 वर्ष पुराने मंदिर का नगर निगम द्वारा जीर्णोद्धार कराने का भी सुझाव दिया।


योजनाबद्ध और पारदर्शी विकास का भरोसा

विधायक अशोक कुमार कोठारी ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार भीलवाड़ा की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देगी और सकारात्मक निर्णय लेकर सुनियोजित, पारदर्शी एवं संतुलित विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।

उन्होंने कहा कि शहर का विकास केवल योजनाओं की घोषणा से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध क्रियान्वयन से संभव है।