मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अरावली विवाद पर राहुल गांधी और अशोक गहलोत को लिया आड़े हाथ
जोधपुर | केंद्रीय कानून एवं विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शुक्रवार (26 दिसंबर) को जोधपुर पहुंचे. एयरपोर्ट पर नाकोड़ा रवाना होने से पूर्व उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की विदेश यात्रा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अरावली पर्वतमाला से जुड़े बयान पर जमकर हमला बोला |
राहुल गांधी की विदेश यात्रा को लेकर पूछे गए सवाल पर अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि मुद्दा विदेश जाना नहीं है, बल्कि विदेश जाकर भारत की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना है. उन्होंने कहा कि आपको सुप्रीम कोर्ट पसंद नहीं, हाईकोर्ट पसंद नहीं, चुनाव आयोग पसंद नहीं |
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर कोई मुद्दा है तो उसे लोकसभा में उठाइए, भारत में अपने कार्यकर्ताओं के बीच रखिए. भारत की जो संस्थाएं अच्छा काम कर रही हैं, उन्हें विदेश जाकर बदनाम करना बिल्कुल उचित नहीं है |
अरावली मुद्दे पर कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का लगाया आरोप
अरावली पर्वतमाला से जुड़े सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस विषय पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव पहले ही स्पष्ट बयान दे चुके हैं, अब इसमें कुछ भी शेष नहीं रहा है | पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मेघवाल ने कहा, “2003 में अरावली को लेकर प्रस्ताव खुद कांग्रेस सरकार का था |
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को भ्रम फैलाने की आदत हो गई है. कभी कहते हैं भाजपा संविधान बदल देगी, कभी आरक्षण खत्म कर देगी. ये सभी बातें सिर्फ भ्रम फैलाने के लिए हैं | अशोक गहलोत अगर अपने पुराने दस्तावेज पढ़ लें, तो उन्हें खुद पता चल जाएगा कि उन्होंने क्या किया था."
राजस्थानी और भोजपुरी भाषा को लेकर दिया सकारात्मक संकेत
राजस्थानी और भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के सवाल पर अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि दोनों भाषाओं को लेकर पहले एक संयुक्त बिल आया था. उन्होंने बताया कि बाद में हिंदी समर्थकों द्वारा हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाने की मांग के चलते मामला नया मोड़ ले गया. इसके बाद जंतर-मंतर पर धरना हुआ और एक समिति का गठन किया गया |
मेघवाल ने कहा, “मैं आज भी इस मुद्दे को लेकर सकारात्मक हूं. राजस्थानी भाषा को साहित्य अकादमी की मान्यता प्राप्त है और उसे पुरस्कार भी दिए जाते हैं. भोजपुरी भाषा के समर्थक भी काफी मुखर हैं. आने वाले समय में इस दिशा में संभावनाएं जरूर बनेंगी.”

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