बुलेट ट्रेन का आगमन: राजस्थान के 9 स्टेशनों के सफर में होगी क्रांति
जयपुर | बिहार चुनाव में शानदार जीत के जयपुर: बिहार चुनाव में शानदार जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को गुजरात के सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन का निरीक्षण के लिए पहुंचे। यहां पीएम मोदी ने सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन का निरीक्षण किया। साथ ही काम का जायजा लिया। माना जा रहा है जल्द ही बुलेट ट्रेन दौड़ने का भारत का सपना पूरा हो सकता है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना काम तेजी से चल रहा है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) का बेसिक इंफ्रास्ट्रक्टर के निर्माण में लगभग पूरा होने की बात की जा रही है। बता दें कि अहमदाबाद से शुरू होकर मुंबई तक जाने वाली पहली बुलेट ट्रेन राजस्थान के भी कई शहरों से होकर गुजर रही है।
राजस्थान में बुलेट ट्रेन का 878 किलोमीटर का रन
उल्लेखनीय है कि बुलेट ट्रेन के लिए बनाया जा रहा मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर में राजस्थान का भी एक बड़ा हिस्सा है। लिहाजा कहा जा सकता है कि आने वाले समय में शुरू होने वाली बुलेट ट्रेन राजस्थान के कई हिस्सों से होकर गुजरेगी, जिसके चलते राजस्थान के लोगों की बड़े शहरों से कनेक्टिविटी खूब बढ़ेगी। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर का ट्रैक 878 किलोमीटर लंबा है।
राजस्थान के ये शहर रहेंगे शामिल
बुलेट ट्रेन की रूट की बात करें तो मुख्य तौर पर जयपुर, अजमेर, बहरोड, शाहजहांपुर, विजयनगर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर और खेरवाड़ा स्टेशन इसमें शामिल हैं। प्रदेश की राजधानी के साथ ही ये रूट राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र के भी कई शहरों को जोड़ रही है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर का 75 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरेगा।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर कितना काम हुआ पूरा ?
बता दें कि इस कॉरिडोर का मूल लंबाई 508 किलोमीटर है, जिसे अब बढ़ाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कॉरिडोर का मूल हिस्से में से लगभग 300 किलोमीटर का ट्रैक पूरा हो चुका है। बुलेट ट्रेन को मुंबई से दिल्ली तक ले जाने के लिए कॉरिडोर को बढ़ाया जा रहा है, जिसका निर्माण तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
जानिए किस स्पीड़ से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन
रेल मंत्रालय और मीडिया रिपोटर्स से मिली जानकारी के अनुसार मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर ट्रैक कंप्लीट होने के बाद यहां ट्रेन 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरेगी। हालांकि रेल मंत्रालय इस ट्रैक पर स्पीड़ टेस्ट के बाद व्यवहारिकता के आधार पर स्पीड़ का मानक तय कर सकती है। धीरे- धीरे स्पीड़ बढ़ाए जाने को लेकर भी चर्चा हैं।

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