भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में मरीज के आहार नली से निकाला नकली दांत
भोपाल: बीएमएचआरसी (भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर) के ग्रैस्ट्रो मेडिसिन विभाग में उत्तर प्रदेश के ललितपुर से आए एक 54 वर्षीय मरीज की जान बचाई गई. दरअसल मरीज की आहार नली में नकली दांत फंस गया था. लेकिन उसे इसकी भनक भी नहीं थी. जब भोजन निगलने में परेशानी होने लगी तब उसे तकलीफ का एहसास हुआ. इसके बाद 3 साल बाद उसने चिकित्सकीय परीक्षण कराया, जिसमें सामने आया कि मरीज की आहार नली में कोई ठोस वस्तु फंसी हुई है. डॉक्टरों ने बताया कि यदि इसका तुरंत इलाज नहीं कराया जाता तो मरीज की जान जाने का भी खतरा था.
सोते समय निगल लिए थे दांत
मरीज ने बीएमएचआरसी के डॉक्टरों को बताया कि उसके नकली दांत लगे हुए हैं. वह खाना खाने के बाद सोते समय भी उन दांतों को नहीं निकालता था. एक दिन वह सोया लेकिन जब सुबह उठा तो उसके दांत नहीं थे. उसे लगा कि हो सकता है उसने मुंह से बाहर निकलकर कहीं रख दिया होगा. इसके बाद वह उस नकली दांतों के सेट को भूल गया. लेकिन कुछ सालों बाद उसके आहारनली में समस्या बढ़ने लगी और उसे कुछ भी खाने में तकलीफ होने लगी. जिसकी वजह से वह लंबे समय तक तरल पदार्थों के सहारे जीवित रहा.
बीएमएचआरसी के डॉक्टरों ने बचाई जान
मरीज इससे पहले ललितपुर, झांसी और ग्वालियर सहित भोपाल के कई अस्पतालों में इलाज कराने गया. लेकिन कहीं भी सटीक इलाज नहीं हुआ. जब वह बीएमएचआरसी पहुंचा तो उसकी एंडोस्कोपी की गई. जिसमें सामने आया कि मरीज की आहार नली में कोई कठोर वस्तु फंसी हुई है, जिसका आकार दांत के सेट की तरह है. लेकिन मरीज की अधिक उम्र को देखते हुए मरीज का जटिल ऑपरेशन करना जोखिमपूर्ण था और इससे उसकी जान को खतरा भी हो सकता था. ऐसे में बीएमएचआरसी के डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसी दिन आपातकालीन एंडोस्कोपी के जरिए बिना ऑपरेशन किए नकली दांत निकाल दिए और उसकी जान बचा ली.
एंडोस्कोपी के बाद अब मरीज स्वस्थ
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने बताया, "गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की विजिटिंग कंसल्टेंट डॉ. तृप्ति मिश्रा के नेतृत्व में एंडोस्कोपी टीम ने सावधानीपूर्वक यह जटिल प्रक्रिया पूर्ण की और दांत को सुरक्षित निकालने में सफलता प्राप्त की. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज की निरंतर मॉनिटरिंग की गई, जिससे संभावित जटिलताओं से बचाव संभव हो सका." डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि एंडोस्कोपी के बाद अब मरीज सामान्य रूप से भोजन कर पा रहा है और बोलने में भी आराम महसूस कर रहा है.

धर्मेंद्र प्रधान का कांग्रेस को संदेश, 'मैं एक स्ट्रीट फाइटर हूं, दबने वाला नहीं'
सरकारी आदेश का इंतजार, केस वापसी को लेकर क्या है पूरा कानूनी नियम?
CM मोहन यादव ने किसानों पर खोला खजाना, ₹3300 करोड़ ट्रांसफर; खंडवा के विकास को मिली रफ्तार
दुबई-मुंबई इंडिगो फ्लाइट को बीच रास्ते बदलना पड़ा रूट, राजकोट में हुई इमरजेंसी लैंडिंग
ईरान का बड़ा फैसला, हमले रोककर शांति वार्ता को दी प्राथमिकता
गृह मंत्री से माफी की मांग के बीच बीजेपी का पलटवार, कहा- कांग्रेस पहले अपना घर संभाले